दूसरे दिन दोपहर को मैंने एक गलती कर दी। रामू घर का काम कर रहा था और मैं बेडरूम बंद करके अंदर सो रही थी। तभी रामू की आवाज आई- “काम खतम हो गया मेमसाब, मैं जा रहा हूँ…”
एकाध मिनट के बाद मैंने रूम का दरवाजा खोला और मैं दरवाजा बंद करने गई तो रामू अभी भी लिफ्ट की राह देखकर खड़ा था। रामू ने मेरे साथ जबरदस्ती की थी उसके बाद मैं उसके साथ बात नहीं करती थी। लेकिन आज मैंने उसके साथ न जाने कैसे बात कर ली- “कान्ता ने दो दिन पहले मेरे पास से 100 लिए हैं, तुम ले लेना…”
मेरी बात सुनकर रामू मेरे सामने देखता रहा। उसकी नजरों से मुझे मेरी गलती का अहसास हो गया। मुझे उसकी नजरों की तपन सहन न हुई तो मैंने दरवाजा बंद कर दिया और चद्दर ओढ़कर सो गई। मैं समझ गई की शायद कान्ता का पति जान गया है की रामू और कान्ता के बीच अवैध संबध है। मैंने वहां ज्यादा देर तक खड़े रहना उचित नहीं समझा तो मैं अंदर जाकर फिर से टीवी देखने लगी। सुबह के 12:00 बजे थे।
मैं खाना खाकर पानी पी रही थी, तभी मैंने आंटी की चीख सुनी। मैं दौड़ती हुई उनके घर गई तो आंटी के सिर से लहू निकल रहा था और वो बेहोश हो गई थी। अंदर के रूम में से गुप्ता अंकल भी बाहर आ गये थे और वो आंटी की हालत देखकर रो रहे थे। बाजू में स्टूल पड़ा हुवा था, शायद आंटी उसपर से गिर गई थी। मैंने अंकल को अम्बुलेन्स बुलाने को कहा, पर अंकल बहुत डरे हुये थे। उनकी हालत देखकर लग रहा था की शायद उनका ब्लड प्रेसर भी बढ़ चुका है। मैंने तुरंत नीरव को फोन करके अम्बुलेन्स भेजने को कहा। तब तक अपार्टमेंट के सारे लोग एकट्ठे हो गये थे।
अंकल की गंदी आदतों के करण अपार्टमेंट में कोई उनसे संबंध नहीं रखता था, पर संजोग को देखते सबने। मिलकर आंटी को नीचे ले लिया। मैंने दोनों घर को लाक कर दिया और नीचे उतरी। तब तक अम्बुलेन्स भी आ गई थी। कोई अंकल के साथ चलने को राजी नहीं था, तो मैं अंकल के साथ आंटी को लेकर अम्बुलेन्स में बैठ गई। हम हास्पिटल पहुँचे तब तक नीरव भी वहां आ गया था और फिर आंटी को एसी रूम में भरती कर दिया। सारे वक़्त अंकल डरे हुये थे क्योंकि उनका यहां कोई नहीं था और वो एक ही बात कर रहे थे- “कोकिला (आंटी का नाम) तुम्हें कुछ हो गया तो मैं भी नहीं जियूंगा…”
नीरव ने अमेरिका में रहते उनके बेटे से बात की तो वो आ नहीं सकता था, पर एक दिन के लिए हमें ध्यान रखने को कहा। दूसरे दिन वो उसके किसी फ्रेंड को भेजने वाला था। थोड़ी देर बाद आंटी को थोड़ा होश भी आया पर वो कुछ बोल नहीं पा रही थी, सिर्फ दर्द की वजह से बेचैन थी और ब्लड बहुत ज्यादा ही बह गया था, इसलिए उन्हें ब्लड की बोतल चढ़ रही थी। शाम के 6:00 बजे मैं घर गई और खाना बनाकर नीरव और अंकल के लिए लेकर आई। आंटी को जब से लगा था, तब से अंकल ने पानी तक मुँह में नहीं डाला था। अंकल के प्रति मेरे सारे गीले सिकने आज दूर हो गये थे, उनका आंटी के तरफ का प्यार देखकर।
मैंने और नीरव ने बहुत समझा बुझाकर उन्हें खाना खिलाया।
डाक्टर ने आकर बताया- “टेन्शन की कोई बात नहीं है…”
उसके बाद अंकल के चेहरे पर थोड़ी मुश्कुराहट आई। रात के 9:00 बजे मैं और नीरव ने घर जाने को सोचा। तभी अचानक आंटी फिर से बेहोश हो गई। ये देखकर अंकल फिर से रोने लगे। नीरव ने डाक्टर को बुलाया।
डाक्टर ने चेक करके कहा- “ज्यादा टेन्शन की कोई बात नहीं है पर ज्यादा उमर होने की वजह से ठीक होने में थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही और तबीयत में उतार चढ़ाव भी आएंगे…”
डाक्टर के जाने के बाद मैंने और नीरव ने हास्पिटल में ही सो जाने का फैसला किया, क्योंकि अंकल की हालत देखकर उनके भरोसे आंटी को अकेला छोड़कर जाना उचित नहीं लग रहा था। रात के 11:00 बजे के आसपास नर्स ने आंटी को बोतल चढ़ानी बंद कर दी, तो हम तीनों ने सो जाने का फैसला किया।
तभी नीरव के मोबाइल में रिंग बजी तो उसने बाहर जाकर बात की, और फिर अंदर आकर कहा- “निशु मुझे जाना पड़ेगा, एक जरूरी काम आ गया है। तुम यहीं पर सो जाओ। सारी अंकल मुझे काम है, मैं जा रहा हूँ। निशा खयाल रखना…” मैं या अंकल कुछ बोलें उससे पहले तो नीरव रूम छोड़कर चला भी गया।
नीरव के जाने के बाद मैं सोच में पड़ गई की ऐसा क्या काम आया होगा की नीरव को इस वक़्त जाना पड़ा। घर का तो कोई काम नहीं होगा, नहीं तो नीरव मुझे बता के जाता। रूम के अंदर दो पलंग थे एक पे तो आंटी थी, मैंने अंकल को दूसरे पलंग पे सोने को कहा।
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